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जीएसटी ई-इनवॉइस रिवर्स चार्ज नियम: 1 जनवरी 2027 से शुरू

प्रकाशित 4 मिनट में पढ़ेंलेखक Govt License टीम

मट्टनचेरी, कोच्चि, भारत में मसालों के गोदाम के दरवाज़े पर बिल्लियाँ, जहाँ व्यापारी माल ख़रीदते हैं और जीएसटी के लिए ख़रीद का रिकॉर्ड रखते हैं
फ़ोटो: Rudolph.A.furtado, CC0 / Wikimedia Commons

1 जनवरी 2027 से जीएसटी ई-इनवॉइस उन आपूर्तियों पर भी लागू होगा जो आपको किसी अपंजीकृत व्यक्ति से मिलती हैं और जिन पर आप रिवर्स चार्ज में कर देते हैं, और सेवाओं के आयात पर भी। यह अधिसूचना सीबीआईसी ने 26 अक्तूबर 2026 को जारी की।

1 जनवरी 2027 से रिवर्स चार्ज और सेवाओं के आयात पर जीएसटी ई-इनवॉइस

क्या बदला

कब: 1 जनवरी 2027 से, सीबीआईसी की अधिसूचना संख्या 04/2026-सेंट्रल टैक्स, दिनांक 26 अक्तूबर 2026 (G.S.R. 918(E)) के तहत।

पहलेअब
पंजीकृत व्यक्ति को आपूर्ति
ई-इनवॉइसिंग के दायरे मेंकोई बदलाव नहीं, अब भी दायरे में
निर्यात
ई-इनवॉइसिंग के दायरे मेंकोई बदलाव नहीं, अब भी दायरे में
अपंजीकृत व्यक्ति से मिली आपूर्ति जिस पर आप रिवर्स चार्ज में कर देते हैं
दायरे में नहीं1 जनवरी 2027 से दायरे में
सेवाओं का आयात
दायरे में नहीं1 जनवरी 2027 से दायरे में
जीएसटी ई-इनवॉइस का दायरा 1 जनवरी 2027 से पहले और बाद में: रिवर्स चार्ज ख़रीद और सेवाओं का आयात जुड़े

रिवर्स चार्ज पर नया जीएसटी ई-इनवॉइस नियम क्या है?

सीबीआईसी ने 26 अक्तूबर 2026 को अधिसूचना संख्या 04/2026-सेंट्रल टैक्स जारी की। यह अधिसूचना संख्या 13/2020-सेंट्रल टैक्स में संशोधन करती है, जो उन आपूर्तियों की सूची तय करती है जिनके लिए ई-इनवॉइस निर्धारित है। सूची में दो तरह के लेन-देन जोड़े गए हैं।

पहला, किसी अपंजीकृत व्यक्ति से मिली वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति, जिसमें प्राप्तकर्ता रिवर्स चार्ज में कर देता है। दूसरा, सेवाओं का आयात। दोनों 1 जनवरी 2027 से दायरे में आते हैं।

रिवर्स चार्ज पर ई-इनवॉइसिंग कब से शुरू होगी?

अधिसूचना के अनुसार यह 1 जनवरी 2027 से लागू होगी। तब तक इन लेन-देन के लिए कुछ नहीं बदलता। पंजीकृत व्यक्तियों को आपूर्ति और निर्यात पहले से सूची में हैं और जैसे हैं वैसे ही रहेंगे।

जीएसटी ई-इनवॉइस रिवर्स चार्ज की मुख्य बातें: 1 जनवरी 2027, अधिसूचना 04/2026, 26 अक्तूबर 2026, दो प्रकार के लेन-देन जुड़े

नया नियम किसे मानना होगा?

अधिसूचना आपूर्ति के प्रकार सूची में जोड़ती है। यह अपनी कोई टर्नओवर सीमा तय नहीं करती। ई-इनवॉइस किसे बनाना है, यह पहले की ई-इनवॉइसिंग अधिसूचनाएँ तय करती हैं, और हमें इस अधिसूचना में उसमें कोई बदलाव नहीं दिखा।

यदि आपका कारोबार पहले से ई-इनवॉइस बनाता है, तो अपने अकाउंटेंट से पूछें कि 1 जनवरी 2027 से आपके बिलिंग सॉफ़्टवेयर में रिवर्स चार्ज ख़रीद और सेवाओं का आयात कैसे संभाला जाएगा। यदि आप आज ई-इनवॉइसिंग में नहीं हैं, तो यह अधिसूचना अकेले आपको उसमें नहीं लाती।

आसान शब्दों में रिवर्स चार्ज क्या है?

आम तौर पर विक्रेता आपसे जीएसटी वसूलकर सरकार को देता है। रिवर्स चार्ज में कर आप ख़ुद देते हैं। ऐसा तब होता है, जैसे, जब आप किसी अपंजीकृत व्यक्ति से कुछ वस्तुएँ या सेवाएँ ख़रीदते हैं, या भारत के बाहर से सेवाएँ ख़रीदते हैं।

जो पंजीकृत कारोबारी छोटे अपंजीकृत विक्रेताओं या विदेशी सेवा प्रदाताओं से ख़रीदते हैं, उन्हें अभी अपना ख़रीद रिकॉर्ड जाँच लेना चाहिए।

छोटे कारोबार को अब क्या करना चाहिए?

आपके पास दो महीने हैं। अपनी रिवर्स चार्ज ख़रीद की सूची बनाएँ, जैसे विदेशी वेंडरों की सेवाएँ, और अपने बिलिंग सॉफ़्टवेयर प्रदाता से पूछें कि अपडेट तैयार होगा या नहीं। अपने GST पंजीकरण का ब्योरा अद्यतन रखें, GST पंजीकरण गाइड.

1 जनवरी 2027 से रिवर्स चार्ज ख़रीद पर जीएसटी ई-इनवॉइसिंग की तैयारी के चार क़दम

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रिवर्स चार्ज पर ई-इनवॉइसिंग कब से शुरू होगी?

1 जनवरी 2027 से, अधिसूचना संख्या 04/2026-सेंट्रल टैक्स, दिनांक 26 अक्तूबर 2026 के तहत।

क्या अब सेवाओं के आयात पर ई-इनवॉइसिंग लागू होगी?

हाँ, 1 जनवरी 2027 से सेवाओं का आयात ई-इनवॉइसिंग वाले लेन-देन में जुड़ गया है। अधिसूचना में वस्तुओं के आयात का ज़िक्र नहीं है।

क्या इस अधिसूचना से हर छोटा कारोबार ई-इनवॉइसिंग में आ जाता है?

नहीं। अधिसूचना केवल लेन-देन के प्रकार जोड़ती है। ई-इनवॉइस कौन बनाएगा, यह पहले की ई-इनवॉइसिंग अधिसूचनाओं से तय होता है। अपने मामले के बारे में अपने अकाउंटेंट से पूछें।

रिवर्स चार्ज पर ई-इनवॉइस कब से लागू होगा?

1 जनवरी 2027 से। अपंजीकृत व्यक्ति से की गई ख़रीद, जिसमें रिवर्स चार्ज पर कर आप देते हैं, और सेवाओं के आयात पर ई-इनवॉइसिंग लागू होगी।

संक्षेप में

सीबीआईसी ने 26 अक्तूबर 2026 को अधिसूचना 04/2026-सेंट्रल टैक्स जारी की। 1 जनवरी 2027 से ई-इनवॉइसिंग अपंजीकृत व्यक्ति से रिवर्स चार्ज वाली ख़रीद और सेवाओं के आयात पर भी लागू होगी। ई-इनवॉइस कौन बनाएगा, यह पहले की अधिसूचनाओं से तय होता है।

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